Wednesday, August 29, 2007

जलता आगरा














































3 comments:

संजय बेंगाणी said...

यह सब हुआ क्यो?

Manish Kumar said...

हे भगवान अब आगरा क्यूँ जलने लगा ?

अनुनाद सिंह said...

एक साथ नहिं होहिं भुवालू,
हंसहिं ठेठाइ फुलावहिं गालू।।

एक साथ दोनो काम नहीं हो सकते - तुष्टीकरण भी हो और बम बिस्फोट न हो, दंगा न हो।