आपको शायद यह जानकर आश्चयर्य होगा कि एक बूढ़े मां बाप के लिए कीर्तिचक्र की कीमत केचल चालीस रुपये है। यह धनरशि उनको सरकार की ओर से दी जाती है। क्योंकि उनका बेटा आज से पच्चीस साल पहले बदमाशों के साथ मुठभेड़ में मारा गया था। सरकार ने तब कहा कि वह शहीद हुआ है। उसकी इस शहादत पर सरकार ने उसको मरणोपरांत कीर्तिचक्र दिया। साथ ही शहीद के पिता को तीस और मां को दस रुपये हर माह देने की घोषणा की। बेटे को समाज की सुरक्षा के लिए कुर्वान करने वाले की कीमत सरकार ने कितनी सस्ती लगाई। चालीस रुपये में दो लोग महीना बिता सकते हैं( अब पच्चीस साल बाद शहीद के मांबाप के सामने भूखों मरने की नौबत आ चुकी है। उनकी तरह जर्जर हो चुका उनका मकान भी पिछले दिनो गिर गया। जर्रज मकान ने जर्जर दोनों बूढ़ों का साथ छोड़ दिया। एक ट्रांसपोर्ट वाले ने रहने की जगह दे रखी है। अब कब तक रहेंगे यहां। एक सरकार के बाद दूसरी सरकार आईं और गई़ लेकिन उनकी हालत पर कोई फर्क नहीं पड़ा। इन दोनों बूढ़ों ने अब शासन को चेतावनी दी है कि उनकी हालत पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे आत्महत्या कर लेंगे। व्रशासन कुछ तो कर नहीं सकता। इसलिए पुलिस कप्तान ने आदेश जारी कर दिया कि उन पर नजर रखी जाय ताकि वे आत्महत्या न कर लें। यह क्या इस समाज के लिए शर्म की बात नहीं है कि उसके शहीद के परिजन भूख गरीबी के साथ अपमानजनक जीवन जिए। यदि ऐसा ही होता रहा तो कोई क्यों शहादत देगा। जो समाज अपने शहीदों को याद नहीं रखता उसका पतन तो निश्चत है।
Tuesday, August 21, 2007
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1 संदेश:
शर्मनाक. बहुत दुख होता है इस तरह के समाचार सुनकर.
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